ولو شاء الله أن يجمع خَلْقَه على الهدى ويجعلهم على ملة واحدة مهتدية لفعل، ولكنه أراد أن يُدخل في رحمته مَن يشاء مِن خواص خلقه. والظالمون أنفسهم بالشرك ما لهم من وليٍّ يتولى أمورهم يوم القيامة، ولا نصير ينصرهم من عقاب الله تعالى.
مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف
تفسير الجلالين
«ولو شاء الله لجعلهم أمة واحدة» أي على دين واحد، وهو الإسلام «ولكن يدخل من يشاء في رحمته والظالمون» الكافرون «ما لهم من وليّ ولا نصير» يدفع عنهم العذاب.
यदि अल्लाह चाहता तो उन्हें एक ही समुदाय बना देता, किन्तु वह जिसे चाहता है अपनी दयालुता में दाख़िल करता है। रहे ज़ालिम, तो उनका न तो कोई निकटवर्ती मित्र है और न कोई (दूर का) सहायक
A translation of the meanings is not the Quran itself, only an attempt to convey its meaning in another language.