الزمر : ٣٦
مكية الجزء ٢٤ صفحة ٤٦٢معاني المفردات
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التفسير الميسر
أليس الله بكاف عبده محمدًا وعيد المشركين وكيدهم من أن ينالوه بسوء؟ بلى إنه سيكفيه في أمر دينه ودنياه، ويدفع عنه مَن أراده بسوء، ويخوِّفونك -أيها الرسول- بآلهتهم التي زعموا أنها ستؤذيك. ومن يخذله الله فيضله عن طريق الحق، فما له مِن هاد يهديه إليه.
مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف
تفسير الجلالين
«أليس الله بكاف عبده» أي النبي، بلى «ويخوّفونك» الخطاب له «بالذين من دونه» أي الأصنام، أن تقتله أو تخبله «ومن يضلل الله فما له من هاد».
جلال الدين المحلي وجلال الدين السيوطي
क्या अल्लाह अपने बन्दे के लिए काफ़ी नहीं है, यद्यपि वे तुम्हें उनसे डराते है, जो उसके सिवा (उन्होंने अपने सहायक बना रखे) है? अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे मार्ग दिखानेवाला कोई नही
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