ولا ينفعكم نصحي واجتهادي في دعوتكم للإيمان، إن كان الله يريد أن يضلَّكم ويهلككم، هو سبحانه مالككم، وإليه تُرجَعون في الآخرة للحساب والجزاء.
مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف
تفسير الجلالين
(ولا ينفعكم نصحي إن أردت أن أنصح لكم إن كان الله يريد أن يغويكم) أي إغواءكم، وجواب الشرط دل عليه "" ولا ينفعكم نصحي "" (هو ربكم وإليه ترجعون) قال تعالى:
अब जबकि अल्लाह ही ने तुम्हें विनष्ट करने का निश्चय कर लिया हो, तो यदि मैं तुम्हारा भला भी चाहूँ, तो मेरा भला चाहना तुम्हें कुछ भी लाभ नहीं पहुँचा सकता। वही तुम्हारा रब है और उसी की ओर तुम्हें पलटना भी है।"
A translation of the meanings is not the Quran itself, only an attempt to convey its meaning in another language.